MOTIVATIONAL STORY OF LORD KRISHNA & ARCHER ARJUN & an OLD BRAHMIN

HELLO GUYS I AM RAHUL MOTIVATIONAL STORY WRITER. I HOPE THIS STORY WILL BE LIKE YOU, THANK YOU. एकबार श्री कृष्णा और उनके सखा धनुर्धर अर्जुन राज्य घूमने केलिए निकले। परिभ्रमण के वक्त उनके नजर एक गरीब ब्राह्मण के ऊपर जा पड़ा जो घर घर जाकर भिक्षा माँग रहे थे।ये सब अर्जुन से देखा नहीं गया, उन्हें अच्छा नहीं लगा कि एक ब्रुध ब्राह्मण भिक्षा मांग रहे हैं और उन्हें ब्राह्मण के ऊपर दया आयी।उसके बाद बुजुर्ग ब्राह्मण को अर्जुन अपने पास बुलाया और ब्राह्मण से अर्जुन ने प्रणाम किया और कहा ब्राह्मण जी आपके लिए मेरे पास कुछ है कहकर अर्जुन ने एक सोने की पोटली निकाली और ब्राह्मण जी के हाथ मे थमा दिया। ब्राह्मण जी बहत खुस हुए कहा किया बात है ! भगवान के सखा से मुझे इतनी बड़ी मदद मिल गई। उसके बाद भगबान को प्रणाम किया और अर्जुन से भी प्रणाम किया और अपने घर के ओर निकले।बहत खुस होते हुए जा रहे थे , रास्ते मे सोच रहेथे की भगबान के दोस्त ने तो मेरा किस्मत बदल दिये और भी बहत कुछ सोच रहे थे।लेकिन ब्राह्मण जी दुर्भाग्य है कि रास्ते मे उनका एक लुटेरा के साथ मुलाकात हुआ।उसके बाद वे लुटेरा ब्राह्मण के पास जो सोने की पोटलील थी उस पोटली को लूट लिया ओर वहाँ से भाग गया। ब्राह्मण बहत दुख हो कर अपने कुटीर को लौट गए। अर्जुन ने ब्राह्मण को आपने पास बुलाया और पूछा कि मैने बिता हुआ काल आपको जो सोने की पिटली दिया था उसका क्या हुआ, आप फिरसे भिक्षा मांगने आ गए।ब्राह्मण बहुत दुख होकर कहा कि क्या बताऊँ प्रभु काल मेरे साथ बहत बुरा हुआ। एक लुटेरा ने आकर आपके दिए हुए सोने की पोटली को लूट लिया। अर्जुन ब्राह्मण से कहा आप दुखी मत हो आपके लिए मेरे पास ओर एक बहत कीमती चीज अनमोल मोती।ये सुनकर ब्राह्मण जी बहत खुस हुए और श्रीकृष्ण को प्रणाम किया अर्जुन को धन्यवाद दिया और चलपडे अपने झोपडी की ओर।झोपड़ी में पहँचने के बाद उन्होंने सोचा कि ये बेश कीमती मोती को कहा छुपायें कैसे चोर की नजरों से बचाएं। फिर उनको एक पुराना घड़ा दिखाई दिया, क्योंकि उनके पास कोई संदूक नही थी मोती को छुपाने केलिए इसलिए वे वो पुराने घड़ा मे ही छुपा दिया। उसके बाद वे थोड़ा आराम करते करते सो गए। इसी बीच उनकी पत्नी घरमें नही थी।नदी किनारे गईथी पानी लाने । किस्मत की खेल देखिए, जब उनके पत्नी नदी से पानी लेके आ रहे थे उसिवक्त रास्ते में उनकी घड़ा टूट गई। ब्राह्मण की पत्नी खाली हाथ झोपडी में आई ओर देखा और एक घड़ा है उसे लेके फिरसे नदी किनारे गयी पानी लाने जहा मोती रखा हुआ था। पामी में घड़ा को इधर उधर हिलाक़े पानी भरते वक्त वो मोती पानी मे बह गेई आर वे पानी लेके अपने झोपड़ी में आ पहुंची। पत्नी झोपड़ी में आनेसे पहले ब्राह्मण जी नींद से उठकर बैठे थे अपने सर में हाथ देकर। जैसे ही पत्नी झोपडी में पहंची ब्राह्मण चिल्लाकर अपने पत्नी से कहा कि ये तूने क्या कर दिया। धनुर्धर अर्जुन ने मुझे फिरसे एक अनमोल मोती दिए थे और में उसे इन घड़ा में छुपाया था । जाकर देखा घड़े के अंदर वो मोती नही थी। फिरसे दोनो दुखी होकर बैठे ऐसे ही दो तीन दिन बीत गये। अगले दिन ब्राह्मण जी फिरसे निकल पड़ेभिक्षा मांगने। पहले जैसे ही भगवान श्री कृष्ण और उनके दोस्त अर्जुन घूम रहे थे ओर फिरसे ब्राह्मण को देखा भिक्षा मांगते हुए। ये सब देखकर अर्जुन फिरसे सोचने लगे कि कल फरसे मेने एक बेष कीमती मोती दिया था परंतु वे फिरसे कैसे आ गए भिक्षा मांगने। उसके बाद ब्राह्मण को अर्जुन बुलाया ब्राह्मण जी आये और भगवान श्री कृष्ण को प्रणाम किया अर्जुन ने ब्राह्मण को प्रणाम किया और पूछा आप फिरसे क्यों भिक्षा मांगने आ गए। फिरसे सारि कहनी ब्राह्मण जी अर्जुन से बता दिये। इसबार अर्जुन भगवान श्री कृष्ण के ओर देखते हुए कहा कि भगवान आपकी कुछ कीजिए ये गरीब ब्राह्मण की कुछ मदद कर दीजिए। ये सुनकर भगवान श्री कृष्ण ने दो सिक्के निकल कर ब्राह्मण जी को दे दिए। देने के बाद भगवान ने ब्राह्मण से कहा कि तुम जेंसे अपने झोपड़ी से आये थे वैसे ही वापस लौट जाइये आगे मत जाइए। भगवान के बात मानकर ब्राह्मण अपने झोपड़ी की ओर निकल पड़े। आते आते वे सोच रहे थे कि अर्जुन कितने महान है जोकि मुझे दो बार कीमती कीमति चीजें दी लेकिन स्वयं भगवान ने केबल दो ही सिक्के दिये। वो दो सिक्के लेकर के आते वक्त वे एक मछवारे को देखा । मछवारे ने एक जाल लेकर आ रहा था उसी जाल में एक सुंदर से मछली फाँसी हुई थी। मछली को देखकर ब्राह्मण को तरस आया और सोचा ये दो सिक्को से तो मेरा कुछ नहीं होने वाला क्यों न में इस मछली की जान बचाऊ। ये सोचकर ब्राह्मण मछवारे से कहा कि जी आप ये दो सिक्के रखिये ओर मुझे ये मछली दे दीजिए। मछवारे ने ब्राह्मण को मछली दे दिया ओर उस मछली को ब्राह्मण ने अपने कमंडल में डाला कमंडल में थोड़ा पानी था । उसके बाद ब्राह्मण जी ने सीधे जा पहुंचे नदी किनारे मछली को पानी में आजाद करने के लिए। मछली को पानी में बस छोड़ने ही वाले थे और देखा कि उनके कमण्डल में वो खोई हुई मोती है। ये जो मछली उस दिन ये मोती को खा लिया था और आज वही मछली से फिरसे वो मोती ब्राह्मण को मिल गया। मछली को पानी मे छोड़ कर बहत खुश हो कर ब्राह्मण चिल्लाते हुए कह रहे थे कि मुझे मिल गया मुझे मिल गया और किस्मत का खेल देखिए उस वक्त वो लुटेरा भी वो सोने की पोटली लेके आ रहा था। लुटेरा ने सुना कि ब्राह्मण मुझे मिल गया मुझे मिल गया बोलते हुए चिल्ला रहा है और सोचा कि सायद ये ब्राह्मण ने मुझे पहचान लिया उसके बाद वो लुटेरा दौड़ के आया और ब्राह्मण की चरणों में गिर कर कहा कृपया मुझे माफ़ कर दीजिए मुझे सजा मत दिलाएं । लुटेरा चला गया ब्राह्मण से। ये सब अर्जुन देख रहे थे और भगवान श्री कृष्ण से नत मस्तक हो कर पूछा कि प्रभु ये आपकी कौनसी माया है। मेने दो बार ब्राह्मण को इतनी कीमती चीज दिया लेकिन ब्राह्मण का कुछ नही हो पाया परंतु आप जब मात्र दो सिक्के क्या दे दिये उसका तो किस्मत ही बदल गया। अंतिम में श्री कृष्ण अर्जुन से कहा कि सखा ये सारा खेल सारे लीला कर्मो की है। जब आप ब्राह्मण जी को दो बार बहत कीमती चीज दिया तब ब्राह्मण ने सिर्फ खुद ओर पत्नी की बारेमें सोचने लगा अपने जिंदगी के बारेमें सोचा लेकिन मेने जब मात्र दो सिक्के दिये टैब उसने किसी ओर की जान बचाने के बारेमें सोचा ओर उसकी किस्मत बदल गई। भगवान श्री कृष्ण, अर्जुन और ये ब्राह्मण की कहानी हमे जिंदगी में बहत बड़ी बात सिखाती है कि अगर आप जिंदगी में अच्छे कर्म करते हैं तो आपके जिंदगी में अपने आप अच्छे फल आएंगे। इसीलिए हमे जब भी मौका मिले तब हमें दूसरों के मदद जरूर करना चाहिए ओर अच्छे काम भी।

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